मातृभूमि की धरोहर अनुवां के लाल कुंजबिहारी पांडेय, समाजसेवा के प्रतीक बने ग्रामप्रधान पद के प्रबल दावेदार


मुंबई/प्रयागराज : प्रयागराज जिले की हंडिया तहसील के प्रतापपुर ब्लॉक में बसा शांतिपूर्ण गांव अनुवां हमेशा से ही अपनी सादगी और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन आज यह गांव एक ऐसे सपूत की बदौलत सुर्खियों में है, जिसने मुंबई की चकाचौंध वाली दुनिया में कदम रखते ही ईमानदारी और मेहनत का परचम लहराया। हम बात कर रहे हैं कुंजबिहारी पांडेय की, जिन्हें अब गांव-गली से लेकर शहर के कोने-कोने तक 'अनुवां का गौरव' कहा जा रहा है। 2026 के आगामी ग्रामप्रधान चुनाव में अपनी उम्मीदवारी की घोषणा करते ही कुंजबिहारी जी ने न केवल मातृभूमि को चौमुखी विकास का संकल्प दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र में एक नई उम्मीद की किरण जगा दी है।
कुंजबिहारी पांडेय का जन्म प्रयागराज हंडिया तहसील प्रतापपुर ब्लॉक के अनुवां गांव में हुआ था। बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई और खेल-कूद में अव्वल रहने वाले इस होनहार बालक ने प्राइमरी और मिडिल की शिक्षा गांव के अनुवां स्कूल से ही ग्रहण की, जबकि हाईस्कूल और कॉलेज की पढ़ाई सराय ममरेज से पूरी की। मात्र 14 साल की नन्ही उम्र में आर्थिक मजबूती के लिए उन्होंने मुंबई का रुख किया और जीविकोपार्जन के क्षेत्र में कदम रखा। 1981 में गौना के बाद पिता और चाचा जी के पान की दुकान के धंधे में पारंगत हो गए। मुंबादेवी मंदिर के धनजी स्ट्रीट इलाके में उन्होंने अपने जैसे सच्चे, ईमानदार और मेहनती साथियों का एक मजबूत समूह गढ़ा, जो न केवल व्यापारियों को बीएमसी और पुलिस के अत्याचारों से बचाता था, बल्कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, भदोही, जौनपुर, बनारस, सोनभद्र और मिर्जापुर के तीर्थयात्रियों को भी सहज दर्शन का अवसर सुनिश्चित करता था। मां मुंबादेवी का आशीर्वाद और झवेरी बाजार-धनजी स्ट्रीट के प्रमुख व्यापारियों का अपार विश्वास ही वह आधार बना, जिसने कुंजबिहारी जी को समाजसेवा के अखाड़े में अजेय योद्धा बना दिया।आज कुंजबिहारी पांडेय का नाम मुंबई के समाजसेवा जगत में विख्यात है। कोई भी संगठन हो या सामाजिक कार्य, उन्हें सबसे पहले निमंत्रण मिलता है और वे सहर्ष सम्मिलित होते हैं। आधी रात को भी यदि कोई कॉल करे—चाहे अस्पताल जाएं, थाने की दौड़-धूप हो या सम्मान की लड़ाई—कुंजबिहारी जी अपने पूरे समूह के साथ तन-मन-धन से हाजिर हो जाते हैं। लॉकडाउन के दौरान जब वे लंबे समय तक मातृभूमि में रुके, तो गांव की बदहाली ने उनके हृदय को व्यथित कर दिया। सरकारी शौचालय, आवास, हैंडपंप, खड़ंजा, नाली, स्ट्रीट लाइट, सौर ऊर्जा लाइट और राशन कार्ड तक की अव्यवस्था देखकर उन्होंने ठान लिया कि 'परिवर्तन ही सृष्टि का नियम है'। इसी संकल्प से प्रेरित होकर उन्होंने अनुवां को ब्लॉक का 'आदर्शग्राम' बनाने का बीड़ा उठाया और 2026 के ग्रामप्रधान चुनाव में उतरने की हुंकार भरी।यह खबर जैसे-जैसे फैल रही है, वैसे-वैसे बधाई देने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। 
मुंबई के व्यापारियों का कहना है, "हम कुंजबिहारी जी के गांव अनुवां घूम आए। वहां के पढ़े-लिखे बुद्धिजीवी, जागरूक युवा और बुजुर्ग सबका समर्थन उनके साथ है।" गांववासियों ने बताया कि कुंजबिहारी जी ने मुंबई से ही मातृभूमि की सेवा जारी रखी। उन्होंने हजारों विद्यार्थियों को कॉपी, पेन और बैग वितरित किए, अंधेरी गलियों को रोशन करने के लिए 150 स्ट्रीट लाइटें लगवाईं, और गांव के बुजुर्गों, महिलाओं व बच्चों के लिए 15 दर्जन आरामदायक कुर्सियां बांटीं युवाओं को बैट बॉल स्टंप वितरित किया। ये कार्य न केवल उनकी उदारता दर्शाते हैं, बल्कि अनुवां को एक आदर्श गांव बनाने की उनकी दृढ़ प्रतिबद्धता को भी उजागर करते हैं।
मुंबई व्यापारी एसोसिएशन के निवेदकों ने कहा, "कुंजबिहारी पांडेय जैसे समाजसेवक गांव के लिए वरदान हैं। सभी का साथ, सभी का विकास—यह उनका मंत्र है।" ग्राम सभा अनुवां की जनता-जनार्दन की मांग पर कुंजबिहारी जी चुनावी समर में उतरने को तैयार हैं, और अभूतपूर्व विजय के साथ मातृभूमि का संपूर्ण विकास करेंगे।कुंजबिहारी पांडेय को उनकी इस नेक यात्रा के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं! अनुवां का भविष्य उज्ज्वल हो, यही प्रार्थना।


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