बंधवा गांव की धड़कन मिंटू भईया का ग्रामप्रधान बनना एक अभूतपूर्व क्रांति का आगमन!
मिर्जापुर: उत्तर प्रदेश के मझवां ब्लॉक के हृदय स्थल बंधवा गांव में एक ऐसी लहर उठ रही है, जो न केवल ग्रामीण विकास की नई इबारत लिख रही है, बल्कि पूरे क्षेत्र को प्रेरणा का संदेश दे रही है। जी हां, हम बात कर रहे हैं युवा क्रांतिकारी और समाजसेवा के सर्वोच्च शिखर पर विराजमान महेंद्र कुमार उपाध्याय उर्फ मिंटू भईया की! 2026 के ग्रामप्रधान चुनाव में उतरने का उनका संकल्प गांव की हर गली-नुक्कड़, हर घर की दीवारों पर गूंज रहा है। बिना पद के भी 25 वर्षों से तन-मन-धन से सेवा करने वाले इस 'बंधवा के सपूत' को ग्रामप्रधान बनते ही क्या चमत्कार होगा? आइए, इस अद्वितीय यात्रा की झलक देखें, जहां हर कदम मानवता की सेवा का प्रतीक है।
11 मार्च 1975 को मातृभूमि बंधवा के प्रतिष्ठित कैलाशनाथ उपाध्याय के घर जन्मे मिंटू भईया बचपन से ही नेतृत्व के प्रतीक थे। बंधवा प्राइमरी स्कूल में प्रारंभिक शिक्षा के दौरान न केवल पढ़ाई में अव्वल रहे, बल्कि खेलकूद में चैंपियन और छात्रों की समस्याओं के निवारण में सबसे आगे थे। वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री हासिल कर उन्होंने ज्ञान का प्रकाश ग्रहण किया, जो आज उनके सेवा कार्यों का आधार बना हुआ है। 2002 में विवाह के बाद 2003 से वाराणसी में व्यापार की शुरुआत की, लेकिन उनका दिल हमेशा मातृभूमि के प्रति धड़कता रहा।बीएचयू के सामने नरिया में मेडिकल स्टोर संचालित करते हुए उन्होंने न केवल दवाओं का कारोबार किया, बल्कि गरीब-असहाय मरीजों की जिंदगी को बचाने का संकल्प भी लिया। तन, मन, धन और अपने व्यापक परिचय शक्ति का उपयोग कर मिर्जापुर की पांचों विधानसभा क्षेत्रों के सैकड़ों गांवों में हजारों असहाय लोगों के सबसे बड़े सहारा बने। कल्पना कीजिए - एक साधारण दवा विक्रेता जो बीएचयू पहुंचने वाले हर जरूरतमंद की एडमिशन से लेकर ऑपरेशन, डिस्चार्ज और घर पहुंचाने तक हर कदम पर साथ खड़ा हो! बिना किसी भेदभाव के, सर्वधर्म समभाव की भावना से सेवा करते हुए उन्होंने हजारों मरीजों के लाखों रुपये के मेडिकल बिल स्वयं भरे, उन्हें अस्पतालों के बंधनों से मुक्त किया। यह कोई साधारण कहानी नहीं, बल्कि एक जीवंत उदाहरण है कि सच्ची सेवा पद से नहीं, हृदय से की जाती है।
बंधवा की बहन-बेटियों, चाची-माइयों की आध्यात्मिक प्यास बुझाने वाले मिंटू भईया का योगदान अविस्मरणीय है। नवरात्रि के दौरान दूर कछवा या जमुआ बाजार जाना पड़ता था दुर्गा पूजा के लिए, लेकिन मिंटू भईया ने इसे बदल दिया। प्रसिद्ध महादेव मंदिर पर दुर्गा पूजा समिति का गठन कर, अपने नेतृत्व में सभी युवाओं को जोड़ते हुए भव्य, दिव्य नवरात्रि आयोजन की शुरुआत की। आज यह आयोजन गांव की सांस्कृतिक धरोहर बन चुका है, जहां गीत-संगीत, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों में मिंटू भईया की सक्रिय भागीदारी हर बार उत्साह का संचार करती है। यह केवल पूजा नहीं, बल्कि गांव की एकजुटता का प्रतीक है!
वाराणसी महानगर में सैकड़ों बेरोजगार युवाओं को नौकरी दिलवाने वाले मिंटू भईया ने कईयों का स्वयं के खर्चे से धंधा भी लगवाया। उनका मानना है, "युवा ही गांव की पूंजी हैं।" बड़े भाई के चुनाव प्रचार के दौरान गांव-गांव जन-जन से मिलते हुए उन्हें प्रेरणा मिली कि अब मातृभूमि बंधवा की सेवा के लिए ग्रामप्रधान बनना होगा। यह संकल्प अब पूरे क्षेत्र की पुकार बन गया है।
बंधवा के हर घर - युवा, वृद्ध, महिलाएं - एक ही स्वर में कह रही हैं: "2026 में हमें मिंटू भईया ही चाहिए!" उनका कहना सटीक है - "बिना प्रधानी के 25 सालों से हर धर्म, हर जाति की सेवा करने वाले मिंटू भईया ग्रामप्रधान बने तो बंधवा का संपूर्ण विकास होगा। मझवां ब्लॉक में हमारा गांव अग्रणी बनेगा!" सड़कें चमकेंगी, शिक्षा-स्वास्थ्य मजबूत होंगे, और हर घर में समृद्धि का सूरज उगेगा।
इस अभूतपूर्व अभियान के केंद्र में मिंटू भईया स्वयं विनम्र हैं। उनका कथन हृदयस्पर्शी है: "मेरे गांव के हर घर का हर जन मेरा पारिवारिक सदस्य है। सेवा करना मेरे रक्त और चरित्र में बसा है। जन-जन की सेवा मेरा प्रथम लक्ष्य है। मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है, और मातृभूमि की सेवा जगदीश्वरी की भक्ति।" उनका यह दर्शन न केवल बंधवा, बल्कि पूरे मिर्जापुर को प्रेरित कर रहा है।
ग्राम एवं क्षेत्र के लोगों का कहना है बंधवा की यह युवा क्रांति अब रुकने वाली नहीं। 2026 में जब महेंद्र कुमार उपाध्याय (मिंटू भईया) ग्रामप्रधान बनेंगे, तो बंधवा न केवल विकसित होगा, बल्कि सेवा का वैश्विक मॉडल बनेगा।
जय मिर्जापुर जय जय बंधवा !
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