असहाय ब्राह्मण पिता की जिंदगी की जंग दो मासूम बच्चों की खुशियां दांव पर, मदद के लिए आगे आएं आप लोग!
मीरजापुर : एक गरीब ब्राह्मण परिवार की दर्दनाक कहानी आज पूरे देश को झकझोर रही है। ग्राम बंधवा, पोस्ट जमुआ, जिला मीरजापुर के निवासी प्रवेश तिवारी (उम्र 36 वर्ष), जो स्वर्गीय विजय शंकर तिवारी के पुत्र हैं, पिछले सितंबर 2021 से कैंसर जैसी घातक बीमारी से जूझ रहे हैं। टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, वाराणसी में उनका इलाज चल रहा है, लेकिन अब दवाओं और इलाज का खर्च इतना बढ़ गया है कि उनके परिवार की सारी उम्मीदें टूटने की कगार पर हैं। दो छोटे-छोटे मासूम बच्चे, जो अभी जीवन की शुरुआत में हैं, अपने पिता की इस असहाय स्थिति को देखकर रोजाना आंसू बहा रहे हैं। क्या हम सब मिलकर इस परिवार को बचा सकते हैं?प्रवेश तिवारी ने अपनी कहानी साझा करते हुए बताया कि शुरुआती वर्षों में उन्होंने अपनी जेब से और कुछ सरकारी मदद से इलाज करवाया, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि हॉस्पिटल से कोई सहायता नहीं मिल रही। "मैंने कभी किसी से मदद नहीं मांगी, लेकिन अब मेरे बच्चों का भविष्य दांव पर है। अगर थोड़ी-बहुत मदद मिल जाए, तो मैं फिर से अपने परिवार के साथ खुशी से जी सकता हूं," उन्होंने भावुक होकर कहा। उनका मोबाइल नंबर 9621332888 है और UPI ID praveshtiwan@oksbi (या इसी प्रकार का) के माध्यम से कोई भी व्यक्ति सीधे मदद पहुंचा सकता है।लेकिन दुख की बात यह है कि स्थानीय स्तर पर कोई भी बड़ा चेहरा इस गरीब ब्राह्मण की मदद के लिए आगे नहीं आ रहा। क्षेत्रीय विधायक, जिलाध्यक्ष और समाजसेवी संगठन चुप्पी साधे बैठे हैं। क्या राजनीतिक व्यस्तताएं या सामाजिक उदासीनता इतनी हावी हो गई है कि एक ब्राह्मण परिवार की जान की कीमत भी नहीं समझी जा रही? जब स्थानीय नेता और संगठन पीछे हट गए हैं, तो अब पड़ोस, क्षेत्र, जिला, प्रदेश और पूरे राष्ट्र के आम लोगों की बारी है। क्या हम सब मिलकर इस पिता को बचा सकते हैं, ताकि उनके दो छोटे बच्चे अनाथ न हो जाएं?यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि हमारे समाज की परीक्षा है। अगर आप इस मार्मिक अपील को पढ़ रहे हैं, तो सोचिए आपके छोटे-से योगदान से एक जीवन बच सकता है, दो बच्चों की मुस्कान लौट सकती है। आज ही संपर्क करें, मदद भेजें। याद रखें, मानवता की असली जीत तब होती है जब हम असहायों के साथ खड़े होते हैं। प्रवेश तिवारी की जिंदगी अब आपके हाथों में है आगे आएं, ब्राह्मण समाज को बचाएं!
यदि आप मदद करना चाहें, तो UPI के माध्यम से स्कैन करें या मोबाइल नंबर पर संपर्क करें। यह अपील सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, और उम्मीद है कि जल्द ही कोई बड़ा बदलाव आएगा।
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