सृष्टि फाउंडेशन की ‘स्पंदन’ संगीत संध्या सुरों के साथ मानवता का उत्सव
मुंबई: मुंबई की सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियों में सृष्टि फाउंडेशन अब एक सशक्त पहचान बन चुका है। नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (एनजीएमए), जहांगीर पब्लिक हॉल में आयोजित ‘स्पंदन’ संगीत संध्या ने न केवल संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि इसकी आत्मा - मानवता, समानता और संवेदनशीलता - ने सभी को गहराई से छुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत शाम 5:30 बजे हुई। यह आयोजन सृष्टि फाउंडेशन एवं सेंटर फॉर क्रिएटिव एक्सीलेंस द्वारा, संस्कृति मंत्रालय के अधीन एनजीएमए मुंबई के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाराष्ट्र के सांस्कृतिक एवं आईटी मंत्री एडवोकेट आशीष शेलार रहे, जबकि गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में प्रसिद्ध फिल्म निर्माता बोनी कपूर उपस्थित थे।
विशिष्ट अतिथियों में पद्मश्री उस्ताद अली घनी, ग़ज़ल गायक घनश्याम वासवानी, लेखक-प्रोड्यूसर शुभ्रो शेखर भट्टाचार्जी, संगीतकार ललित सेन, शास्त्रीय गायक दीपक प्रसाद एवं रमेश जूले सहित अनेक प्रशासनिक अधिकारी और कला-जगत की हस्तियां शामिल रहीं।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा - आईआरएस अधिकारी आभा रानी सिंह द्वारा रचित काव्य-संग्रह ‘रात के पहलू में’ के वीडियो एल्बम का लोकार्पण, जिसे बोनी कपूर ने लॉन्च किया। इस एल्बम को डॉ. बिमन सैकिया की भावपूर्ण आवाज़ ने विशेष ऊँचाई दी। वहीं, प्रसिद्ध गायिका सुचेता भट्टाचार्जी की प्रस्तुति “लव – बंदिश – ब्लिस” ने शास्त्रीय और समकालीन संगीत के अनूठे संगम को मंच पर जीवंत कर दिया।
कलाकारों की श्रृंखला में संचिता भट्टाचार्या, फिल्म अभिनेत्री मंजरी फडनिस, बुद्धा एम, नीलव चक्रवर्ती और मुकुल पुरी की प्रस्तुतियों ने सभागार को सुरों से भर दिया। दर्शक देर रात तक संगीत के इस स्पंदन में डूबे रहे। कार्यक्रम की सराहना करते हुए बोनी कपूर ने सृष्टि फाउंडेशन के आगामी आयोजनों में सक्रिय भागीदारी का आश्वासन भी दिया।
इस अवसर पर दैनिक भास्कर के संपादक विजय सिंह का सम्मान सृष्टि फाउंडेशन के अध्यक्ष बिपिन गुप्ता द्वारा, आईआरएस आभा रानी सिंह एवं सुचेता भट्टाचार्जी की उपस्थिति में किया गया।
हालांकि, इस भव्य आयोजन की सबसे गहरी छाप कार्यक्रम की भव्यता नहीं, बल्कि सृष्टि फाउंडेशन के अध्यक्ष बिपिन गुप्ता की सादगी और मानवीय संवेदनशीलता रही। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब सभागार खचाखच भर गया और अतिरिक्त कुर्सियों के बावजूद स्थान कम पड़ गया, तब बिपिन गुप्ता ने बिना किसी संकोच के अपनी कुर्सी छोड़ दी। उन्होंने खड़े अतिथियों से बैठने का आग्रह किया और स्वयं पहले ज़मीन पर, फिर हॉल की सीढ़ियों पर बैठ गए।
यह दृश्य उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों को भावुक कर गया।
सृष्टि फाउंडेशन की यही विशिष्ट पहचान है कि यहां समाज के ‘शून्य से शिखर’ तक हर व्यक्ति को समान सम्मान मिलता है। हॉकर्स, टैक्सी चालक, चाय-पान विक्रेता, ड्राइवर, सुरक्षा कर्मी, वॉचमैन और लिफ्टमैन—सभी को बिपिन गुप्ता ने आदरपूर्वक आमंत्रित कर अतिथि का दर्जा दिया।
‘स्पंदन’ केवल एक संगीत संध्या नहीं थी, बल्कि यह उस विचार का जीवंत प्रमाण थी कि कला तब सार्थक होती है, जब वह इंसानियत से जुड़ती है।
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