लोकनेता राजाराम महादेव देशमुख जनसेवा के प्रतीक, श्री सिद्धिविनायक गणपती मंदिर न्यास मा.सर्वश्री विश्वस्त
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति और समाजसेवा के क्षेत्र में एक ऐसा नाम जो लोगों के हृदय में बस गया है
लोकनेता श्री राजाराम महादेव देशमुख। सांगली जिले के आटपाड़ी गांव में 10 अक्टूबर 1972 को जन्मे राजाराम महादेव देशमुख ने अपने जीवन को समर्पित कर दिया है लोकहित के कार्यों को।
उनके पिता श्री महादेव देशमुख आजाद हिंद फौज के वीर स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने रंगून से पैतृक गांव लौटकर राष्ट्रभक्ति की मिसाल कायम की। राजाराम जी की प्राथमिक शिक्षा गांव के ही ग्रामीण विद्यालय में हुई, जहां कक्षा एक से ही वे छात्रनेता (मॉनिटर) बनकर उभरे। इंटरमीडिएट के बाद उन्होंने जनसेवा को ही अपना जीवन मंत्र बना लिया।1990 से 2000 तक पश्चिम बंगाल के विभिन्न शहरों में रहकर उन्होंने स्वर्ण व्यवसायियों और कारीगरों के हितों की रक्षा की। कोलकाता में बसकर उन्होंने वहां की सामाजिक चुनौतियों का सामना किया। उसके बाद पुणे और मुंबई पहुंचे, जहां मुंबादेवी के पास एशिया के नंबर वन झवेरी बाजार में हितचिंतकों के सहयोग से हॉलमार्किंग और कंप्यूटर टेस्टिंग सेंटर की स्थापना की। यहां से शुरू हुई उनकी यात्रा ने पूरे झवेरी बाजार को प्रभावित किया। स्वभाव से ही सहज और समर्पित, राजाराम जी ने स्वर्णकार समन्वय समिति के माध्यम से व्यापारियों, कारीगरों और ग्राहकों की हर समस्या का निदान किया।
मुंबई की 26 जुलाई 2005 की भयानक बाढ़ आपदा ने शहर को हिला दिया था। ऐसे में राजाराम महादेव देशमुख ने स्वर्णकार समन्वय समिति के जरिए झवेरी बाजार के सभी व्यापारियों से सहयोग का आह्वान किया। खुद अपनी संपूर्ण आय का 50% दान देकर उन्होंने बेघर बाढ़ पीड़ितों के लिए अभिभावकीय भूमिका निभाई। यह उनकी मानवता और संवेदनशीलता का प्रतीक था। समाज में बेटियों के विवाह को एक बड़ी चुनौती मानते हुए, राजाराम जी ने निःशुल्क सामूहिक विवाह आयोजन की शुरुआत की। 100% स्वयं के खर्च पर वे गरीब किसानों, अनाथ और निर्धन परिवारों की हजारों बेटियों का कन्यादान, विदाई उपहार और वर-वधू के गहनों सहित सम्पूर्ण विवाह का भार उठाते हैं।
महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में उन्होंने न केवल मनुष्यों बल्कि पशुओं के लिए भी भोजन, चारा और पानी की व्यवस्था की। सर्वधर्म समभाव की भावना से जल टैंकरों के जरिए सूखे की मार से निजात दिलाई।
इन सभी परोपकारी कार्यों से प्रभावित होकर महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्षा श्रीमती प्रभारीव ने 2005 में उन्हें ग्राहक संरक्षण सेल का महाराष्ट्र अध्यक्ष नियुक्त किया। राजाराम जी ने अपने कर्तव्यों का पूर्ण निर्वहन किया, लेकिन राजनीतिक गुटबाजी के कारण बाद में चुनौतियां आईं। 2005, 2009 और 2014 के विधानसभा चुनावों में खानापुर से कोल्हापुर तक उनकी उम्मीदवारी की मांग उठी, लेकिन षड्यंत्रों ने टिकट कटवा दिया। फिर भी, पार्टी निष्ठा में डटे रहे और बिना किसी पद के भी जनसेवा जारी रखी।
उनकी जनसेवा की कीर्ति पर प्रसन्न होकर माणिकराव ठाकरे और ए.के. एंटोनी ने उन्हें भारत सरकार की ग्रामविकास दक्षता कमेटी का सदस्य, आरोग्य कमेटी का महाराष्ट्र अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस कमेटी का सचिव और फिर महासचिव बनाया। वे अपनी मातृभूमि के नौ रत्नों क्रांतीसिंह नाना पाटील, गो. दि. माडगूळकर, शंकरराव खरात, अण्णाभाऊ साठे, वसंत दादा पाटील, राजाराम बापू पाटील, राम नाईक, डॉ. कुलगुरू पतंगराव कदम और आर.आर. पाटील से प्रेरित हैं।
COVID-19 महामारी के दौरान जब कोई किसी की सुध ना ले रहा था तब इन्होंने गरीबों नागरिकों को 2000 PPE किट, 200 ऑक्सीमीटर, 200 थर्मल गन, 25,000 मास्क, 25,000 दस्ताने और 50,000 सैनिटाइज़र की बोतलों का मुफ़्त वितरण भी किया।
वर्तमान में राजाराम महादेव देशमुख मुंबई के सुप्रसिद्ध सिद्धिविनायक गणपति मंदिर के विश्वसनीय ट्रस्टी हैं। यहां उनके नेतृत्व में देश-विदेश की हस्तियां जैसे अंबानी परिवार, कुमार मंगलम बिरला, अमिताभ बच्चन, स्वामी कैलाशानंद जी, त्रिनिदाद, सऊदी और ऑस्ट्रेलिया के लोग, नेता-अभिनेता और सभी पार्टियों के अध्यक्ष दर्शन के लिए आते हैं। हाल ही में रिलायन्स के प्रमुख मुकेश अंबानी, अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी-राज कुंद्रा और तेलुगु सिनेमा के राम चरण ने उनके स्वागत में बाप्पा की मूर्ति प्राप्त की।
इन दर्शनों को VIP मेहमानों के लिए अविस्मरणीय बनाने में राजाराम जी की भूमिका सराहनीय है। दैनिक जागरण जंक्शन , जैसे मीडिया माध्यम उनके सहयोगी रहे हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर वे हर प्रांत के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ सक्रिय हैं। स्वर्णव्यापारियों और कामगारों के हितों के लिए स्वर्णकार समन्वय समिति के माध्यम से देशव्यापी संघर्ष कर रहे हैं। उनका मानना है
"जनसेवा ही ईश्वर सेवा"।
लोकनेता राजाराम महादेव देशमुख जैसे व्यक्तित्व समाज को दिशा दिखाते रहेंगे।
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